Brief Description
(भै. र. । ज्वरा.)
शुष्कमूलादिकस्याङ्गैरङ्गारङ्गारकस्य च ।
पक्वं तैलं ज्वरहरं शोथपाण्ड्वामयापहम् ।।
बृहहदङ्गारकं तैलं जलमत्र चतुर्गुणम् ।।
शुष्क मूलादि तैल और अंगारक तैल के कल्क तथा चार गुने पानीके साथ तैल सिद्ध करें ।
इसकी मालिशसे वर, शोथ और पाण्डुका नाश होता है।
१. अङ्गारक तेलका कल्क - मूर्वा, लाख, हल्दी, दारुहल्दी, मजीट, इन्द्रायणकी जड़, कटेली, सेवा, कूठ, सरना, जटामांसी और शतावर
२. शुष्कमूलादि तैल कल्क -
शुष्कमूलकवर्षाभूदारास्नामहौषधैः ।
पक्वमभ्यमनाचैलं सशूलं श्वयधुं जयेत् ।।
कल्क-सूखी मूली, पुनर्नवा, देवदारु, रास्ना और सोंठ २-२ तोला ले कर कल्क बनावें ।क्वाथ-उपरोक्त ओषधियां ३२-३२ तोले से कर १६ सेर पानीमें पकावें और १ सेर शेष रहनेपर छान लें।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ज्वरघ्नम् - Jvaraghnam - Antipyretic / Febrifuge | बृहदङ्गारकतैलम् (Bruhadangaraka Tailam) | भै. र. । ज्वरा | |||
| 2 | पाण्डुरोगम् - Pandurogam - Disease spectrum with altered blood circulation and tissue perfusions and blood production | बृहदङ्गारकतैलम् (Bruhadangaraka Tailam) | भै. र. । ज्वरा | |||
| 3 | शोथम् (Shotham , Inflammatory Edema) | बृहदङ्गारकतैलम् (Bruhadangaraka Tailam) | भै. र. । ज्वरा |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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