Brief Description
( यो. र. । कुष्ठा. ; वृ. यो. त. । त. ८०.)
तेलाढके समतुषाम्बु हयारिहेम
निर्गुण्डिभास्करशिफाशृतया तु सिद्धम् ।
धत्तूरकुष्ठफलिनी विषहेमदुग्धा
रास्नाहयारिकटभीमरिचोपचित्राः ।।
मांसी वचा दहनसर्षपदेवदारु
दार्वी निशारुबुजतुत्रिफलासमङ्गाः।
पिष्ट्वा क्षिपेत्पलमिता विषगर्भमेतत्
तैलं समस्तपवनामयनाशनं स्यात् ।।
द्रव पदार्थ--कांजी ८ सेर, कनेरकी जड़का क्वाथ ८ सेर, धतूरका रस ८ सेर, संभालुका रस ८ सेर और आककी जड़का क्वाथ ८ सेर ।कल्क--धतूरा, कूठ, कलियारीकी जड़, विष (बछनाग), चोक ( सत्यानाशीकी जड़), रास्ना, कनेरकी जड़की छाल, मालकंगनी, काली मिर्च, बड़ी दन्तीकी जड़, जटामांसी, बच, चीता, सरसों, देवदारु, दारुहल्दी, हल्दी, अरण्डमूल, लाक्षा, हरे, बहेड़ा, आमला और मजीठ ५-५ तोले ले कर बारीक पीस लें।
८ सेर तेलमें उपरोक्त समस्त द्रव पदार्थ और कल्क मिला कर मंदाग्नि पर पकावें । जब जलांश शुष्क हो जाय तो तेलको छान लें। इसकी मालिशसे समस्त वातजरोग नष्ट होते हैं।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | वातरोगम् /मरुत् रोगम् - Vata Rogam / Marut rogam - Disease spectrum of Movement diseases involving Musculoskeletal and Nervous System | लघु विषगर्भतैलम् (Laghu Vishagarbha Tailam) | यो. र. । कुष्ठा. ; वृ. यो. त. । त. ८० |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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