Brief Description
(वृ. यो. त. । त. १७४)
सितचन्दनागरुकुङ्कुमामरदारूसिल्हकसारिवा मृगनाभि रक्तपटीरवालकमुस्तकुन्दुरुधान्यकैः ।
तगरैलवालुकबोलकुष्ठपतङ्गभृङ्गलवङ्गकैः रजनीशवीरणमूलपीतपटीरयोजनवल्लिभिः ॥ दलनागकेसरजातिकोशमुराशठीबहुलानखैः र्झालिकाविडालजटावचावरशीघ्रजातिफलैरपि ।
मृदुपेषितैस्तिलजं चतुर्दधिवारिधारिजतूदकेन समेन साधु विपाचयेदिदमाख्यया रतिबल्लभम् ॥
रतिवल्लभस्य विलेपनादचिरेण पञ्चशरप्रभवोऽबलासु नरो चिरप्यबलो बली भवतीन्द्रवत् ।
मन्थरप्रमदागणेन न तुष्यति प्रसभं रतौ शतहायनोऽपि समीरपित्तकफामयेन समुज्ज्ञितः ॥
कल्क--सफेद चन्दन, अगर, केसर, देवदारु, सिल्हक, शारिवा, कस्तूरी, लाल चन्दन, सुगन्धवाला, नागरमोथा, कुन्दरु, धनिया, तगर, एलबालक, बोल, कूठ, पतङ्ग काष्ट, दालचीनी, लौंग, कपूर, खस, पीला चन्दन, मजीठ, तेजपात, नागकेसर, जावत्री, मुरामांसी, कचूर, इलायची, नख नामक सुगन्ध द्रव्य, सुपारी, खट्टासी ( जुन्द बेदस्तर ), जटामांसी, वच, केसर, पीली खस
और जायफल प्रत्येक २ तोले २ माशे लेकर सबको एकत्र पीसकर बारीक करूक बनावें ।
८ सेर तिलके तेलमें यह कल्क, ३२ सेर दही और ८-८ सेर नागरमोथेका क्वाथ तथा लाखका पानी मिला कर पकावें । जब जलांश शुष्क हो जाय तो तेलको छान लें।
इसकी मालिशसे पुरानी नपुंस्कता भी नष्ट हो जाती और कामशक्ति अत्यधिक बढ़ जाती है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अतिवृष्य /वाजिकरण ( Ativrushya/Vajikarana) | रतिवल्लभ तैलम् (Rativallabha Tailam) | वृ. यो. त. । त. १७४ |
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|