Brief Description
(ग. नि. । आसवा. ६)
द्राक्षायाः शर्करायाश्च गुडस्य च पृथक पृथक् ।
पलानि दश कार्याणि पथ्यापलचतुष्टयम् ॥ लवङ्गबदरीसर्जार्जुनानां छल्लिकाभवम् ।
पलं पलं पृथग्ग्राह्यं देवदारुपलं तथा ॥ चित्रकस्य च लोध्रस्य पिप्पलीमूलकस्य च ।
धातकीकुसुमानां च तद्वद्देयं पलं पलम् ॥ तथा पूगफलानां तु कषायाणां पलं मतम् ।
मञ्जिष्ठायाः पले द्वे तु क्वाथ्यसंज्ञानि तानि च।। लवङ्गकलिकाजातीपत्रैलानागकेशरम् ।
पिप्पलीशुण्ठिमरिचत्वङ्मांसीचव्यमुस्तकम् ।। कुष्ठं जातीफलं ग्रन्थिपर्णी स्नुक् कटुरोहिणी।
एषां पलं पलं ग्राह्यं तज्ज्ञेयं चूर्णसंज्ञितम् ॥ ततस्तु क्वाथ्यद्रव्येभ्यो जलमष्टगुणं क्षिपेत् ।
क्वाथं तदुदके कुर्यादर्धभागावशेषितम् ॥ तत्क्वाथं वस्त्रपूतं तु भाण्डेऽन्यस्मिन्मनोहरे ।
कृत्वाऽत्र पक्षिपेच्चूर्णं तद्भाण्डं धान्यराशिगम्।। कृत्वा सप्तदिनं शीते काले चोष्णमये तथा।
यावद्दिनानि त्रीणि स्युः पश्चाद्भाण्डं समुद्धरेत् ।। पुनस्तद्वस्त्रपूतं तु भाण्डे कर्पूरवासिते ।
निक्षिप्य सेवयेत्प्रातः पलमात्रोपलक्षितम् ।। स दत्तो वातपित्तघ्नो दीपनो रक्तरोगनुत् ।
योगराज इति ख्यात आसवोऽयं गुणोत्तरः ।।
क्वाथ्य द्रव्य-द्राक्षा, खाण्ड और गुड़ १० - १० पल ( ५०-५० तोले ); हर्र ४ पल, लौंग,
बेरकी छाल, चीड़, अर्जुनकी छाल, देवदारु, चीतामूल, लोध, पीपलामूल, धायके फूल और सुपारी १-१ पल (५-५ तोले ) और मजीठ २ पल ।
सबको अधकुटा करके आठ गुने (२३ सेर) - पानीमें पकावें और जब ११॥ सेर पानी शेष रहेतो छान लें। ।
प्रक्षेप द्रव्य--लौंगकी कली, जावी, तेजपात, इलायची, नागकेसर, पीपल, सोंठ, मिर्च, दालचीनी, जटामांसी, चब, नागरमोथा, कूठ, जायफल, गठीवन, थूहरका डंडा और कुटकी ५-५ तोले लेकर चूर्ण बनावें।
विधि--एक स्वच्छ मृत्पात्रमें उपरोक्त क्वाथ और प्रक्षेपदव्य डाल कर सबको अच्छी तरह मिलाकर पात्रका मुख बन्द कर दें और उसे अनाजके ढेरमें दबा दें। यदि शीतकाल हो तो सात दिन पश्चात् और ग्रीष्म काल हो तो ३ दिन पश्चात् आसवको निकाल कर छानकर कर्पूरवासित पात्रमें भर कर सुरक्षित रखें ।
इसके सेवनसे वात पित्तज रोग और रक्त विकार नष्ट होते तथा अग्नि दीस होती है।
मात्रा-५ तोले । समय-प्रातःकाल. ( व्यवहारिक मात्रा-२ तोले ।)
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | वातरोगम् /मरुत् रोगम् - Vata Rogam / Marut rogam - Disease spectrum of Movement diseases involving Musculoskeletal and Nervous System | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ | |||
| 2 | दीपनम् - Deepanam - Eupeptic / Appetizer / stomachic / Metabolic rate accelerator | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ | |||
| 3 | पित्तज व्याधि (Pittaja vyadhi, Diseases of pitta) | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ | |||
| 4 | रक्तदोषम् / रक्तज रोगाः / शोणितगदम् - Raktadosham / Raktajarogam / Shonitagadam - Spectrum of diseases with involvement of blood as prime pathological factor | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ | |||
| 5 | वातपित्तज व्याधि (Vatapittaja vyadhi, Diseases of Vata and pitta) | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ | |||
| 6 | वातपित्तरक्त व्याधि (Vatapittarakta vyadhi) | योगराजासव (Yogarajasava) | ग. नि. । आसवा. ६ |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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