Brief Description
(भै. र. । वाजीकरणा.)
सूतो गन्धस्तथा लौहं त्रिसमं शुदमभ्रकम् ।
कर्पूरं सैन्धवं मांसी धात्रैला च कटुत्रयम् ।।
जातीकोषफलं पत्रं लवङ्गं जीरकद्वयम् ।
यष्टीमधु वचा कुष्ठं हरिद्रा देवदारुकम् ॥
हिज्जलं टङ्कणं भार्ङ्गी नागरं पुष्पकेशरम् ।
शृङ्गी तालीशपत्रञ्च द्राक्षाग्निदन्तिमूलकम् ॥
बला चातिबला चोचं धनिकेभकणा शटी।
सजलं जलदं गन्धा विदारी च शतावरी ।।
अर्कवानरीबीजञ्च गोक्षुरं वृद्धदारकम् ।
त्रैलोक्यविजयाबीजं समांशं पेषयेद् भिषक् ॥
शतावरीरसं दत्वा श्लक्ष्णचूर्णं समाचरेत् ।
शाल्मलीमूलचूर्णन्तु चूर्णाङ्घ्रिसममाहरेत् ।।
चूर्णार्धं विजयाचूर्ण विशुद्धं तत्र दापयेत् ।
सर्वमेकत्र संयोज्य छागीक्षीरेण पेषयेत् ॥
मोदकार्थे सिता देया पाकयोग्या तथा मधु ।
नातिवाह्यञ्च धूमान्ते पाचयेन्मन्दवह्निना ॥
चातुर्जातं सकर्पूरं सैन्धवं सकटुत्रयम् ।
सञ्चूर्ण्य च ततो देयं हव्यं किञ्चिन्निधापयेत् ।।
पाकं ज्ञात्वा शाणमिदं मोदकं परिकल्पयेत् ।
भूतनाथे सुरपतौ रतिनाथे तथैव च ॥
ज्वलनं गणनाथे च मोदकाग्रं निवेदयेत् ।
मूलमन्त्रं समुच्चार्य ज्वलने तु समर्पयेत् ॥
ततोऽभिमन्त्रितम् । “ॐ ह्लीं शं सःअमृतं कुरु कुरु अमृते अमृतोद्भवाय नमः ह्लीं अमृतं कुरु कुरु अमृतेश्वराय स्वाहा । ॐ स्वाहा।" इति मन्त्रेणाभिमन्त्रितं कृत्वा पात्रान्तरे स्थापयेत् ॥
काञ्चने राजते काचे मृद्भाण्डे वा निधापयेत् ।
प्रातःकाले शुचिर्भूत्वा हरगौरीं प्रपूजयेत् ॥
कालानलभवं बीजं सतिलं घृतसंयुतम् ।
गव्यक्षीरं सितायुक्तमनुपेयञ्च पायसम् ।।
विलासार्थं प्रदोषे च मोदकं परिसेवयेत्
त्रिसप्ताहप्रयोगेण कामान्धो जायते नरः ॥
कामज्वरो भवेत्तावद्यावन्नारीं न गच्छति ।
स सहस्रवरारोहा रमयत्यपि सोद्गमः ॥
न च लिङ्गस्य शैथिल्यं वेगवीर्यं विवर्द्धयेत् ।
प्रमदाप्राणबाहुल्यं मत्तवारणविक्रमः ॥
भामावश्यकरो रम्यः ऊर्ध्वरेता भवेन्नरः ।
कामतुल्यं भवेद्रूपं स्वरः परभृतोपमः॥
खगतुल्या भवेद् दृष्टिर्वृद्धोऽपि तरुणायते ।
अष्टोत्तरं भजेद्यस्तु भवेत्तस्य सुधोपमम् ॥
वीर्यवृद्धिकरं श्रेष्ठं जरामृत्युविनाशनम् ।
अपस्मारज्वरोन्मादक्षयानिलगदापहम् ।।
कासं श्वासं सशोथञ्च भगन्दरगुदामयम् ।
अग्निमान्द्यमतीसारं विविधं ग्रहणीगदम् ॥
बहुमूत्रं प्रमेहञ्च शिरोरोगमरोचकम् ।
हन्ति सर्वगदान् घोरान् वातपित्तबलासजान् ।।
वन्ध्या च मृतवत्सा च नष्टपुष्पा च या भवेत् ।
बहुपुत्रा जीववत्सा भवेदस्य निषेवणात् ॥
हरते सूतिकारोगं वृक्षमिन्द्राशनिर्यथा ।
मोदकं मदनानन्दं सर्वरोगे महौषधम् ।।
कथितं देवदेवेन रावणस्य हितार्थिना ।।
पारद, गन्धक, लौहभस्म, प्रत्येक १ तोला, अभ्रकभस्म ३ तोले, कपूर, सेन्धा नमक, जटामांसी,
आंवला, छोटी इलायची, सोंठ, पिप्पली, कालीमिर्च, जावित्री, जायफल, तेजपत्र, लौंग, जीरा, कालाजोरा, मुलहठी, वच, कूट, हल्दी, देवदारु, हिज्जलबीज, सुहागा, भारंगी, सोंठ, नागकेसर, काकड़ासिंगी, तालीशपत्र, द्राक्षा, चित्रकमूल, दन्तीमूल, बला, अतिबला, दालचीनी, धनियां, गजपिप्पली, कचूर, सुगन्धबाला, मोथा, प्रसारणी, विदारीकन्द, शतावर, मदार की जड़, कौंचके बीज, गोखरू, विधाराबीज, और भांग के बीज; प्रत्येक का चूर्ण १ तोला । इस सम्पूर्ण चूर्ण को शतावर के रस से मर्दन कर शुष्क करलें और पुन: बारीक चूर्ण करके उसमें इस चूर्ण से चतुर्थांश संभल की मूसली का चूर्ण मिला वे । एवं इस सम्पूर्ण चूर्ण से आधा विशुद्ध भांग का चूर्ण डालकर एकत्र मिश्रितकर बकरी के दूध से पेषणकर शुष्क करलें । तदनन्तर सम्पूर्ण चूर्ण से दुगनी खांड को खांड से चौगुनी दूध में घोलकर मन्द मन्द अग्नि पर पकावें ।
चाशनी हो जाने पर उपर्युक्त चूर्ण का प्रक्षेप - दें और अच्छी प्रकार आलोडन कर नीचे उतार लें । पश्चात् दालचीनी, तेजपत्र, छोटी इलायची, नागकेसर, कर्पूर, सेन्धानमक,
और त्रिकटु (सोंठ, मिर्च, पीपल) का चूर्ण (समानभाग-मिश्रित २ तोले) मिलादें । अन्त में उपयुक्त मात्रा में घृत एवं मधु मिलाकर मोदक बनावें । मात्रा | २ माशे से आधे तोले तक । पाक करने के पश्चात् शिव, इन्द्र, कामदेव, अग्नि तथा गणेश प्रभृति देवों के लिये नैवेद्य दें तथा अग्नि के मूलमन्त्र द्वारा मोदक को अभिमन्त्रित करके अग्नि को समर्पण करें । ओं ह्ली. इत्यादि मन्त्र द्वारा अभिमन्त्रित करके सुवर्ण, रजत, कांच अथवा मट्टी के पात्र में रख दें।
अगले दिन प्रातःकाल शुद्ध होकर शिव तथा पार्वती की पूजा करें। अनुपान-कालानल (रुद्राक्ष)
बीज, तिल तथा घी (एकत्र मिश्रित) अथवा खांड युक्त गोदुग्ध अथवा पायस (खीर) । सम्भोग के लिये सायंकाल मोदक सेवन करना चाहिये । तीन सप्ताह तक इसका प्रयोग करने से मनुष्य कामान्ध होजाता है । इस के सेवन से वीर्यवृद्धि होती है एवं रतिशक्ति बढ़ती है । इसके सेवन करने वाले का रूप कामदेव के समान सुन्दर, स्वर कोयल के समान मधुर तथा गरुड़ के समान दीर्ध दृष्टि होती है । इसके सेवन से वृद्ध पुरुष भी युवा के समान सामर्थ्ययुक्त होता है । एवं १०८ मोदक सेवन | करने पर यह अमृत के समान गुण करता है । यह वीर्यवर्द्धक, रसायन है । इसके सेवन से अपस्मार,
ज्वर, उन्माद, क्षय, वातव्याधि, कास, श्वास, शोथ, भगन्दर, अर्श, अग्निमान्द्य, अतिसार, ग्रहणी, बहुमूत्र, प्रमेह, शिरोरोग, अरुचि, तथा अन्य वातज, पैत्तिक, श्लैष्मिक रोग नष्ट होते हैं । इस के सेवन से जो स्त्री वन्ध्या, मृतवत्सा (जिन के बच्चे पैदा होकर मर जाते हों ) अथवा नष्टपुष्पा (नष्टार्तवा) हो वह भी बहुपुत्रा तथा जीवत्वत्सा होती है। यह मोदक सूतिकारोग को नष्ट करता है और सम्पूर्ण रोगों की उत्कृष्ट औषध है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अतिवृष्य /वाजिकरण ( Ativrushya/Vajikarana) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 2 | नारीप्रियत्वम् (Nari priyatva-Androphilia, Gy | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 3 | सुभगत्वम्/सुदर्शनत्वम्/सुरूपत्वम् (Subhagtvam/Surupatvam/Sudarshanatvam - Look enhancement/Beatifying/Skin toning) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 4 | रसायनम् - Rasayana - Drug action which prevents old age and prolongs life with proper nourishment to the body | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 5 | स्वर्य (Svarya, Voice melody enhancer) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 6 | नेत्र/दृष्टि वर्धन/नेत्र रसायनम् (Netra/Drushti Vardhana -Vision enhancers) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 7 | वृष्य/वाजीकरण (Vrushya/Vajikarana, Aphrodisiac) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 8 | अकालमृत्युहरणम् - Akala mrutyuharanam - Pharmaceutical action which reduces the risk of Untimely death | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 9 | अपस्मार (Apasmara, seizure diseases with alte | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 10 | शुक्रवृद्धिकरम् / शुक्रलम् - Shukravruddhikaram / shukralam - Drug action which increases the quantity of semen | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 11 | ज्वरघ्नम् - Jvaraghnam - Antipyretic / Febrifuge | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 12 | उन्मादम् - Unmadam - Disease spectrum with altered mental health of a person | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 13 | वातरोगम् /मरुत् रोगम् - Vata Rogam / Marut rogam - Disease spectrum of Movement diseases involving Musculoskeletal and Nervous System | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 14 | कासः - Kasa - Disease spectrum with Cough | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 15 | श्वासम् - Shvasam - Disease Spectrum with difficulty breathing | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 16 | शोथम् (Shotham , Inflammatory Edema) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 17 | भगन्धर (Bhagandara, Anal fistula or diseases | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 18 | बहुमूत्रता - Bahumutrata - Polyuria | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 19 | प्रमेहः - Prameha - Disease spectrum with increased urgency, frequency and quantity and altered quality of urine | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 20 | शिरोरोगम् - Shirorogam - Disease spectrum with headaches | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 21 | क्षय रोगम् / राजयक्ष्मा / शोषम् - Kshaya Rogam / Rajayakshma / Shosham - Disease spectrum with progressive emaciation or cachexia | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 22 | अतिस्निग्धम् - Atisnigdham - Excessively unctuous / Excessive adiposity | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 23 | मृतगर्भम् (Mrutagarbham - Still birth/Perinatal infant Mortality) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 24 | सूतिका रोगम् (Sutika Rogam - Puerperium diseases) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 25 | सकल रोगहरम् / सर्व रोगहरम् - Sakala Rogaharam / Sarva Rogaharam - Drug that can be prescribed for every disease | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 26 | वन्ध्या - Vandhya - Female Infertility | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 27 | अरुचि / अरसज्ञता / अरोचकम् - Aruchi / Arasajnata / Arochakam - Hypogeusia / Loss of taste / Anorexia | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण | |||
| 28 | नष्टार्तवम् /नष्टपुष्पम् (Nashtartava/Nashtapushpa - Amenorrhea) | मदनानन्दमोदकम् -1 (Madanananda Modakam-1) | भै. र. । वाजीकरण |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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