Brief Description
(न. मृ. । त. ८)
पारदः कर्षमात्र: स्यात्तावन्मात्र तु गन्धकम् । तावन्मात्रस्तु खदिरस्तेषां कुर्यात्तु कज्जलीम् ॥
रजनी केशरं त्रुटयौ जीरयुग्मं यवानिका ।चन्दनद्वितयं कृष्णा वांसी मांसी च पत्रकम् ।।
अर्द्धकर्षमितं सर्वं चूर्णयित्वा च निक्षिपेत्। तत्सर्वं मधुसर्पिभ्यां द्विपलाभ्यां पृथक्पृथक् ॥
मर्दयेदथ तत् खादेदर्ध कर्षमितं नरः ।व्रणः फिरङ्गरोगोत्थस्तस्यावश्यं विनश्यति ।।
अन्योऽपि चिरजातोऽपि प्रशाम्यति महाव्रणः। एतद्भक्षयतः शोथो मुखस्यान्तर्न जायते ।।
वर्जयेदत्र लवणमेकविंशतिवासरान् । घृतयुक्तामथो शुष्कां भक्षयेत्करपट्टिकाम् ।।
प्रसंगात्कथिता तात उपदंशहरी क्रिया। व्रणवत्कुष्ठवच्चात्र कर्तव्या विविधाः क्रियाः ।।
स्वेदनं वमनं चाथ तीक्ष्णं चैव विरेचनम् । ततश्च औषधीनां वै प्रयोगमुपयोजयेत् ।।
शुद्ध पारद १। तोला, शुद्ध ग क १३ तोला और कत्था १॥ तेला लेकर तीनोंकी कज्जली बनावें और फिर उसमें हल्दी, केसर, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, सफेद जीरा, काला जीरा, अजवायन, सफेद चन्दन, लाल चन्दन, पीपल, बंसलोचन, जटामांसी और तेजपात; इनका ७॥-७॥ माशे चूर्ण मिलावें । तदनन्तर उसमें १०-१० तोला घी और शहद मिलाकर सुरक्षित रक्खें ।
मात्रा--७॥ माशे।
इसके सेवन से मुखमें शोथ हुवे बिना ही फिरंग रोगके व्रण अवश्य नष्ट हो जाते हैं तथा यह रस अन्य प्रकारके पुराने व्रणो को भी नष्ट कर देता है।
पथ्यापथ्य--२१ दिन तक नमक खाना छोड़ दें और घी के साथ या रूखी रोटी खावें।फिरंग रोगमें कुष्ठ और व्रणकी चिकित्सा के समान उपचार करने चाहिये । स्नेहन स्वेदन के पश्चात् यमन और तीक्ष्ण विरेचन देना चाहिये और फिर औषधियां सेवन करानी चाहिये ।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | उपदंशम् - Upadamsham - Disease spectrum with penile lesions | उपदंशघ्न रसः (Upadamshaghna Rasam) | न. मृ. । त. ८ | |||
| 2 | फिरङ्ग रोगम् (Phiranga Rogam) | उपदंशघ्न रसः (Upadamshaghna Rasam) | न. मृ. । त. ८ | |||
| 3 | चिरजात व्रणम् (Chirajata Vrunam - Longstanding non healing Ulcers) | उपदंशघ्न रसः (Upadamshaghna Rasam) | न. मृ. । त. ८ |
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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