Brief Description
हस्तिकर्णस्य वै मूलं गृहीत्वा चूर्णयेद्धर ! । सर्व्वरोगविनिर्म्मक्तं चूर्णं पलशतं शिव ! ॥ सक्षीरं भक्षितं कुर्य्यात् सप्ताहेन वृषध्वज ! । नरं श्रुतिधरं शूरं मृगेन्द्रगतिविक्रमम् ॥ पद्मगौरप्रतीकाशं युक्तं दशशतायुषा । षोडशाब्दाकृतिं रुद्र ! सततं दुग्धभोजितम् ॥ मधुसर्पिःसमायुक्तं जग्धमायुष्करं भवेत् । तज्जग्धं मधुना सार्द्धं दशवर्षसहस्रिणम् ॥ कुर्य्यान्नरं श्रुतिधरं प्रमदाजनवल्लभम् । दध्ना नित्यं भक्षितन्तु वज्रदेहकरं शिव ! ॥ कृष्णकेशसमायुक्तं नरं वर्षसहस्रिणम् । तच्च काञ्जिकसंयुक्तं नरं कुर्य्याच्च भक्षितम् ॥ शतवर्षं दिव्यदेहं बलीपलितवर्ज्जितम् । जग्धं त्रिफलया युक्तं चक्षुष्मन्तं करोति वै ॥ अन्धः पश्येत्तु चूर्णस्य सांज्यस्यैव तु भक्षणात् । महिषक्षीरसंयुक्तं तल्लेपः-कृष्णकेशकृत् ॥ खल्लीटस्य च वै केशा भवन्ति वृषभध्वज ! । तैलयुक्तेन चूर्णेन बलीपलितवर्ज्जितम् ॥ तदुद्वर्त्तनमात्रेण सर्व्वरोगैः प्रमुच्यते । सच्छागक्षीरचूर्णेन दृष्टिः षण्मासतोऽञ्जनात् ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | कफज व्याधि (Diseases associated with Kapha) | कफघ्न / कफ संशमन गणम् - Kaphaghna / Kapha samshamana Ganam | अ.सं.सू.१५/७ , अ.हृ.सू.१४/१ , सु.सू.३८/९ |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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