Brief Description
च .चि.१/१-४५-५७
पञ्चानां पञ्चमूलानां भागान् दशपलोन्मितान्| हरीतकीसहस्रं च त्रिगुणामलकं नवम्||४१||
विदारिगन्धां बृहतीं पृश्निपर्णीं निदिग्धिकाम्| विद्याद्विदारिगन्धाद्यं श्वदंष्ट्रापञ्चमं गणम्||४२||
बिल्वाग्निमन्थश्योनाकं काश्मर्यमथ पाटलाम्| पुनर्नवां शूर्पपर्ण्यौ बलामेरण्डमेव च||४३||
जीवकर्षभकौ मेदां जीवन्तीं सशतावरीम्| शरेक्षुदर्भकाशानां शालीनां मूलमेव च||४४||
इत्येषां पञ्चमूलानां पञ्चानामुपकल्पयेत्| भागान् यथोक्तांस्तत्सर्वं साध्यं दशगुणेऽम्भसि||४५||
दशभागावशेषं तु पूतं तं ग्राहयेद्रसम्| हरीतकीश्च ताः सर्वाः सर्वाण्यामलकानि च||४६||
तानि सर्वाण्यनस्थीनि फलान्यापोथ्य कूर्चनैः| विनीय तस्मिन्निर्यूहे चूर्णानीमानि दापयेत्||४७||
मण्डूकपर्ण्याः पिप्पल्याः शङ्खपुष्प्याः प्लवस्य च| मुस्तानां सविडङ्गानां चन्दनागुरुणोस्तथा||४८||
मधुकस्य हरिद्राया वचायाः कनकस्य च| भागांश्चतुष्पलान् कृत्वा सूक्ष्मैलायास्त्वचस्तथा||४९||
सितोपलासहस्रं च चूर्णितं तुलयाऽधिकम्| तैलस्य द्व्याढकं तत्र दद्यात्त्रीणि च सर्पिषः||५०||
साध्यमौदुम्बरे पात्रे तत् सर्वं मृदुनाऽग्निना| ज्ञात्वा लेह्यमदग्धं च शीतं क्षौद्रेण संसृजेत्||५१||
क्षौद्रप्रमाणं स्नेहार्धं तत् सर्वं घृतभाजने| तिष्ठेत्सम्मूर्च्छितं तस्य मात्रां काले प्रयोजयेत्||५२||
या नोपरुन्ध्यादाहारमेकं मात्रा जरां प्रति| षष्टिकः पयसा चात्र जीर्णे भोजनमिष्यते||५३||
वैखानसा वालखिल्यास्तथा चान्ये तपोधनाः| रसायनमिदं प्राश्य बभूवुरमितायुषः||५४||
मुक्त्वा जीर्णं वपुश्चाग्र्यमवापुस्तरुणं वयः| वीततन्द्राक्लमश्वासा निरातङ्काः समाहिताः||५५||
मेधास्मृतिबलोपेताश्चिररात्रं तपोधनाः| ब्राह्मं तपो ब्रह्मचर्यं चेरुश्चात्यन्तनिष्ठया||५६||
रसायनमिदं ब्राह्ममायुष्कामः प्रयोजयेत्| दीर्घमायुर्वयश्चाग्र्यं कामांश्चेष्टान् समश्नुते||५७||
(इति ब्राह्मरसायनम्)
पथ्यासहस्रं त्रिगुणधात्रीफल समन्वितम्| पञ्चानां पञ्चमूलानां सार्धं पलशतद्वयम्||१५||
जले दशगुणे पक्त्वा दशभागस्थिते रसे| आपोथ्य कृत्वा त्वनस्थीनि विजयामलकान्यथा||१६||
विनीय तस्मिन्निर्यूहे योजयेत्कुडवांशकम्| त्वगेला मुस्त रजनी पिप्पल्यगुरु चन्दनम्||१७||
मण्डूकपर्णी कनक शङ्खपुष्पी वचा प्लवम्| यष्ट्याह्वयं विडङ्गं च चूर्णितं तुलयाऽधिकम्||१८||
सितोपलार्धभारं च पात्राणि त्रीणि सर्पिषः| द्वे च तैलात् पचेत्सर्वं तदग्नौ लेहतां गतम्||१९||
अवतीर्णं हिमं युञ्ज्याद्विंशैः क्षौद्रशतैस्त्रिभिः| ततः खजेन मथितं निदध्याद् घृतभाजने||२०||
या नोपरुन्ध्यादाहारमेकं मात्राऽस्य सा स्मृता| षष्टिकः पयसा चात्र जीर्णे भोजनमिष्यते||२१||
वैखानसा वालखिल्यास्तथा चान्ये तपोधनाः| ब्रह्मणा विहितं धन्यमिदं प्राश्य रसायनम्||२२||
तन्द्रा श्रमाक्लम वली पलितामयवर्जिताः| मेघा स्मृति बलोपेता बभूवुरमितायुषः||२३||
सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या
अभयानां सहस्रमामलकसहस्रत्रितययुतम्| तथा पञ्चानां पञ्चमूलानां पलशतद्वयं सार्धं सलिले दशगुणे पक्त्वा दशांशस्थिते रस आपोथ्य-मृदित्वा, हरीतक्यामलकानि व्यस्थीनि कृत्वा तस्मिन् क्वाथे प्रक्षिप्य कुडवप्रमाणं त्वगेलादिकं चूर्णितं योजयेत्| कनकं-नागकेसरम्| व्यस्थीनीति "नपुंसकमनपुंसकेन" इत्येकशेषः| पलशतेनाधिकं शर्कराया अर्धभारम्, घृतस्य त्रीण्याढकानि, द्वे चाढके तैलात्, तत्सर्वं वह्नौ पचेत्| तच्च लेहतां गतमवतीर्णं शीतं क्षौद्रशतैस्त्रिभिर्विंशत्यधिकैर्युञ्जीत| विंशैरिति 'विंशतेः पूरणे' इति पूरणेऽर्थे डिभिः| 'विंशतेर्डित्' इति टिलोपे विंशशब्दः| अनन्तरं खजेनालोडितं घृतभाण्डे निदध्यात्| या-मात्रा, एकमाहारं-सायंतनं, नोपरुन्ध्यात् साऽस्य रसायनस्य मात्रा स्मृता| आहारमेकमिति वचनाच्च प्रथमाहारकालस्य रसायनमात्रयाऽवश्यमुपरोधः कार्य इति वेदयति| अस्मिंश्च लेहे जीर्णे षष्टिकः क्षीरेण सह भोजनमिष्टम्| वैखानसादयो ब्रह्मणा निर्मितमेतदुपयुज्य रसायनं तन्द्रादिवर्जिता मेधादियुता अमितजीविताश्चाभूवन्| धन्यमिति धनाय हितम्| ननु, रसायनस्य धनार्जनोपायत्वाभावात् कथं धन्यत्वम् ? अत्र ब्रूमः| कार्ये कारणोपचारादेवमुक्तम्| तथा हि रसायनमिदमामयघ्नत्वादारोग्ये च सति मेधास्मृत्यायुक्तस्य धनायोद्यमं कुर्वतोऽवश्यं धनसम्प[म्प्रा]त्तिरिति युक्तमेव| ननु, आमयवर्जैता इत्यनेनैवोक्तार्थत्वात् तन्द्रादिग्रहणमवाच्यमेव| अत्राचक्षमहे| आमयवर्जिते स्वास्थ्यानुवृत्तिकरणसामर्थ्यमस्य रसायनस्यावादीत्तन्त्रकृत्| तन्द्रादिग्रहणं च रोगनाशेऽप्यस्य ज्यायस्त्वमिति प्रतिपादनार्थम्| ["अभयामलकबिभीतकपञ्चात्मकपञ्चमूलनिर्यूहे| वल्लीपलाशकरसे द्विगुणे क्षीरेऽष्टगुणे च विपचेत|| घृतस्य कुम्भं मधुकं मधूकं काकोलियुग्मं च बलां स्वगुप्ताम्| सक्षीरशुक्लामृषभं सजीवं सुखाम्बुपस्तच्च पिबेद्गुणाढ्यम्|| (सम्. उ. अ. ४९)"]
आयुर्वेददीपिका व्याख्या (चक्रपाणिदत्त कृत)
पञ्चानामित्यादौ प्रतिद्रव्यं दशपलभागग्रहणम् [४] , उक्तं हि जतूकर्णे- “इति पञ्च पञ्चमूलानि, तेषां प्रतिद्रव्यं दशपलानि” इति| हरीतकीसहस्रमिति हरीतकीफलसहस्रम्| शूर्पपर्ण्यौ मुद्गमाषपर्ण्यौ| वीरा जालन्धरं शाकम्| कूर्चनं जर्जरीकरणसाधनं शिलापुत्रकमुसलादि| विनीयेति प्रक्षिप्य| प्लवः कैवर्तमुस्तकम्| कनकं नागकेशरम्| त्वक् गुडत्वक्| औदुम्बरे इति ताम्रमये| स्नेहार्धमिति सर्पिस्तैलार्धम्| एकम् अनपराह्णिकमाहारम्||४१-५७||
शालपर्णी, बनभंटा, पृश्निपर्णी, कटेली, गोखरु, बेल, अरणी, अरलु, गम्भारी, पाढल, पुनर्नवा ( बिसखपरा ), मुद्गपर्णी, माषपर्णी, बला (खरैटो ), अरण्ड, जीवक, ऋषभक, मेदा, जीवन्ती, शतावरी, शर, ईख, दाभ काश और शालीधान्य । इन पच्चीस ओषधियों में से बड़े वृक्षांकी जड़की छाल और शेषकी जड़ १०-१० तोले तथा १००० पल हरड और ३ हजार फल आमले लेकर सबको २० गुने पानी में पका और दशा भाग पानी शेष रहने पर छान लें एवं हरड और आमलेांकी गुठली अलग करके उन्हें कूट लें। तदनन्तर यह क्वाथ, हरे, आमले और मण्डूकपर्णी, पीपल, शंखपुष्पी, केवटी मोथा, नागरमोथा, बायबिडंग, सफेद चन्दन, अगर, मुलैठी, हल्दी, बच, नागकेसर, छोटी इलायची और दालचीनीका चूर्ण २०-२० तोले, खांड इन सबसे ६२ सेर अधिक अर्थात ६२ + ३ = ६६ सेर और १६ सेर तेल तथा २४ सेर घी मिलाकर तांबेके कटाह में मन्दाग्निपर पकावें । जब अवलेह तैयार हो जाय तो उसे अग्निसे नीचे उतार कर रखदें और उसके ठण्डा होने पर उसमें १२ सेर शहद मिलाकर चिकने पात्रमें भरकर रख दें।
इसे इतनी मात्रानुसार खाना चाहिये कि जिससे भूख बन्द न हो जाय । एवं औषध पच जाने पर साठीक चावलेकि भात और दूध का आहार करना चाहिये। इस रसायनको सेवन करके वानप्रस्थी, बालखिल्य और अन्य तपस्वी लोगों ने दीर्घायु प्राप्त की थी। उनके वृद्ध शरीर पुनः यौवनको प्राप्त हो गये थे एवं वे तन्द्रा, क्लम और श्वासादि रोग रहित होकर बली, स्मृतिमान् और मेधावान् होकर दीर्घकाल तक ब्रह्मचर्य व्रतका पालन करते हुवे तपस्या करते रहे थे।
दीर्घायुकी इच्छा करने वाले व्यक्तियोंको यह रसायन सेवन करनी चाहिये । इसके सेवनसे दीर्घायु और तरुणावस्था प्राप्त होती है
| ब्राह्म रसायनम् - 1 / अभयामलकी रसायनम् - Brahma Rasayanam - 1 / Abhayamalaki Rasayanm | ||||
| 1000 Chebulic myrobeaons and 3000 Indian Gooseberries tied in seperate cloth and Hanged in kashayam while boiling. Kashayam should be prepared and filtered. 1000 Chebulic myrobeaons and 3000 Indian Gooseberries washed deseeded and fried with Ghee and Gingily Oil and smashed. Rock sugar, Fried Chebulic Myrobeans and Indian Goose berries are added to Kashaya and boiled to get Lehapaaka. Then Prakshepaka Dravya churna added and after cooling down Honey should be added. Dose - 1 Pala | ||||
| Sankrith Name | Scientific name | Hindi Name | English Name | Quantity |
| कषाय द्रव्य / Drugs for Decoction - Water redced to 10 Parts | ||||
| बिल्व मूलम् - Bilva Mulam | Aegle marmelos | बेल कि जड - Bel ki Jad | Bael tree / Bengal Quince - Roots | 10 |
| अग्निमन्थ मूलम् -1 - Agnimantha Mulam -1 | Clerodendrum phlomidis | अरणी/अगेथू -1 के जड - Arani / Agethu -1 ke Jad | Sage glory Bower plant - Roots | 10 |
| श्योनाक / टुण्टुक मूलम् - Shyonaka / Tuntuka Mulam | Oroxylum indicum | सोनापाठा की जड - Sonapatha ki jad | Indian Trumpet Flower - Roots | 10 |
| काश्मर्य मूलम् - Kashmarya Mulam | Gmelina arborea | काश्मर्य की जड - Kashmarya ki Jad | Candahar tree / White Teak - Roots | 10 |
| पाटल मूलम् - Patala Mulam | Stereospermum personatum | पारल / पारोली की जड - Paral / Paroli ki Jad | Trumpet Flower, Yellow Snake tree - Roots | 10 |
| शालपर्णी पञ्चाङ्गम् - Shaalaparni Ki Panchangam | Desmodium gangeticum | सरिवान की पंचांगम् - Sarivan ki Panchang | Desmodium - Whole Plant Cuttings | 10 |
| पृष्णपर्णी पञ्चाङ्गम् - Prushnaparni Panchangam | Uraria picta | पिठवन / दब्र पंचांग - Pithavana / dabra Panchang | Dabra - Whole Plant Cuttings | 10 |
| बृहती मूलम् - 1 - Bruhati Mulam -1 | Solanum indicum/Solanum ferox/Solanum aculeatissimum/Solanum albicaule/ | बडी कटैरी की जड - Badhi Katairi ki Jad | Poison Berry - Roots | 10 |
| कण्ठकारी पञ्चाङ्गम् - Kanthakari Panchangam | Solanum surattense / Solanum Xanthocarpum/Solanum aculeatissimum/ | छोटी कटेरी / भटकटैया की पञ्चाङ्ग - Choti Kateri / Bhatkataiyya ki Panchang | Wild Eggplant, Yellow Berried Nightshade - Whole Plant Cuttings | 10 |
| गोक्षुर पञ्चाङ्गम् - Gokshura Panchang | Tribulus Terrestris | गोखुरू पंचांग - Gokhuru Panchang | Land Caltrops, Puncture Vine - Whole plant | 10 |
| बला मूलम् - Bala Mulam | Sida cordifolia | खैरटी / बरियार की जड - Khairati / Bariyaar Ki Jad | Country Mallow - Roots | 10 |
| पुनर्नवा मूलम् - Punarnava Mulam | Boerhavia diffusa | लाल पुनर्नवा पंचांग - Lal Punarnava mulam | Red Spiderling - Roots | 10 |
| श्वेत एरण्ड मूलम् - Shveta Eranda Mulam | Ricinus communis | सफ़ेद् एरण्डी की जड - Safed Erandi Jad | Castor - White Variant - Roots | 10 |
| मुद्गपर्णी पञ्चाङ्गम् - Mudgaparni Panchangam | Phaseolus trilobus | जंग्ली मूंग पंचांग - Jangli Moong Panchang | Wild Gram. | 10 |
| माषपर्णी पञ्चाङ्गम् - Mashaparni Panchangam | Teramnus labialis | जंग्ली उर्द पंचांग - Jangli Urd Panchang | WIld Black gram | 10 |
| जीवक मूलम् - Jeevaka Mulam | Microstylis wallichi | जीवक की जड - Jeevak ki jad | Jeevaka roots | 10 |
| ऋषभक मूलम् - Rushabhaka Mulam | Microstylis musifera | ऋषभक की जड - Rushabhaka Ki Jad | Rushabhaka | 10 |
| मेदा मूलम् - Meda Mulam | Polygonatum cirrhifolium | मेदा की जड - Meda ki Jad | Meda | 10 |
| जीवन्ती मूलम् - 1 - Jeevanti Mulam - 1 | Leptadenia reticulata | डोडी की पंचाग - Dodi Ki Panchang | Leptadenia - Whole Plant Cuttings | 10 |
| शतावरी मूलम् - Shatavarai Mulam | Asparagus racemosus | शतावर की जड - Shatavara ki Jad | Indian asparagus - Roots | 10 |
| शर / मुञ्जा / बाण मूलम् - Shara / Munja / Bana Mulam | Saccharum munja | सरकन्डा / मूंज की जड - Sarkanda / Moonj ki Jad | Munj Sweetcane - Roots | 10 |
| काण्डेक्षु मूलम् - Kandekshu Mulam | 10 | |||
| दर्भ मूलम् - Darbha Mulam | Imperata cylindrica | उलू / सिऱू /दर्भ मूल - Uloo/ Sirhu / Darbha mool | Cogon grass, Cotton grass, Thatch grass - Roots | 10 |
| काश मूलम् - Kasha Mulam | Saccharum spontaneum | कांस घास की जड - Kans ghaas ki Jad | Kans grass, serio grass, wild cane, wild sugarcane - Roots | 10 |
| शाली मूलम् - Shali Mulam | Oryza sativa | साठी / चावल घास की जड - Sathi / Chavala ghas ki Jad | Rice / Paddy Grass roots | 10 |
| जलम् - Jalam | H2O | पानी - Pani | Water | 2500 |
| हरीतकी फलम् - Haritaki Phalam | Terminalia chebula | हरड फल - Harad Phala | Chebulic Myrobalan, Black Myrobalan - Dried Fruit | 1000 No |
| आमलकी फलम् - Amalaki Phalam | Emblica officinalis | आंवला का साबूत - Avla sabut | Emblic, Indian gooseberry - Dried Fruit | 3000 No |
| खण्डशर्करा / मत्स्याण्डिका - Khandasharkara / Matsyandika | - | मिश्री - Mishri | Rock Sugar | 1100 |
| Prakshepaka Dravya | ||||
| मण्डूकपर्णी / ब्राह्मी - 1 पञ्चाङ्गम् - Mandukaparni / Brahmi - 1 Panchangam | Centella asiatica | मण्डूकपर्णी / ब्राह्मी पंचांग - Mandukaparni / Brahmi Panchang | Asiatic Pennywort / Indian Pennywort / Gotukala - Whole Dried Plant | 4 |
| पिप्पली / मागधी / उपकुल्या / कणा / कृष्णा फलम् - Pippali / Magadhi / Upakulya/ Kana / Krushna Phalam | Piper longum | बढी पिप्पली - Badhi Pippali | Indian Long Pepper / Joborandi - Dried Fruit | 4 |
| श्वेत शंखपुष्पम् / श्वेत अपराजिता / महाश्वेता मूलम् - Shveta Shankhapushpam / Shveta Aparajita / Mahashveta Mulam | Clitoria ternatea | सफेद अपराजिता जड | Butterfly Pea, Winged- leaved Clitoria, Mezereon - White Varient Roots | 4 |
| कैवर्त मुस्तक मूलम् - Kaivarta Mustaka Mulam | Cyperus platystilis | कैवर्त मोथा की जड - Kaivarta Motha ki Jad | Nut grass - Roots | 4 |
| मुस्ता कन्दम् - Musta Kandam | Cyperus rotundus | नागरमोथा की जड - Musta ki Jad | Nut Grass - Tubers | 4 |
| विडङ्ग फलम् - Vidanaga Phalam | Embelia ribes | बावोबरंग / बायुविडंग के फल - Baobarang / Bayuvidanga ke Phal | Embelia - Fruits | 4 |
| श्वेत चन्दन सारम् - Sheta Chandana Saram | Santalum album | श्वेत चन्दन लकडी - Shveta Chandana Lakadi | White Sandalwood - Pith Wood | 4 |
| अगरु काण्डसारम् निर्गन्ध - Agaru Kanda Saram Nirgandha | Aquilaria agallocha | अगर/ औध की काण्डसार निर्गन्ध - Agar / Oudh Ki Kandasaar Nirgandha | Aloewood, Eaglewood, Agarwood - Heart wood without perfume | 4 |
| यष्टिमधु काण्डम् - Yashtimadhu Kandam | Glycyrrhiza glabra | मुल्हेटी कि काण्डभाग - Mulheti Ka Kandabhag | Licorice / Liquorice - Stem Cuttings | 4 |
| हरिद्रा मूलम् - Haridra Mulam | Curcuma longa | हल्दी - Haldi | Turmeric Roots | 4 |
| वचा मूलम् - Vacha Mulam | Acorus calamus | बच की जड - Bach ki Jad | Sweet flag - Roots | 4 |
| नागपुष्प केसरम् - Nagapushpam Kesaram | Mesua ferrea | नागकेसर की केसर - Nagakesar ki Kesar | Iron-wood / Mesu - Stamens | 4 |
| एला - Ela | Elettaria cardamomum | इलायची - Elaichi | Lesser Cardamom - Whole Dried Fruit | 4 |
| त्वक् - 1 - Tvak - 1 | Cinnamomum zeylanicum. | दाल्चिनि की छाल - Dalchinni ki Chaal | Ceylon Cinnamon- Bark | 4 |
| तिलतैलम् - Tila Tailam | Sesamum indicum | तिल के तेल - Til ka Tel | Sesame, Gingelly oil | 124 |
| घृतम् - Ghrutam | घी - Ghee | Ghee - Clarified Butter | 192 | |
| मधु - Madhu | शहद - Shahd | Honey | 158 | |
| Samskruta Name | Description |
| रसायनम् - Rasayanam | Pharmacological action which rejuvenate the body and delays Aging |
| आयुष्यम् - Ayushyam | Pharmacological action which prolongs lifespan |
| तन्द्रा - Tandra | Altered level of cognition, stupor, Semi Vegetative state |
| क्लमम् - Klamam | Disease spectrum with severe exhaustion without dyspnea which diminishes senses |
| श्वासम् - Shwasam | Disease Spectrum with difficulty breathing |
| भयम् / आतङ्कम् - Bhayam / Atankam | Disease spectrum with Phobias |
| मेधा जननम् - Medha Jananam | Drug action which enhances intellect |
| स्मृतिकरम् - Smrutikaram | Drug action which enhances Memory power |
| बलकारक / बल्य - Balakaraka / Balya | Ergogenic , strength enhancer, Tonic |
| वयस्थापकम् - Vayasthapakam | Pharmacological Action which preserves youthness |
| वली - Vali | Skin Wrinkles |
| धन्यम् - Dhanyam | Mystic Property which gives Wealth |
| श्रमम् - Shramam | Disease spectrum with severe exhaustion with dyspnea which diminishes senses |
| पलितम् - Palitam | Hair whitening / Gray hair / Canities |
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|