Brief Description
अष्टाङ्गहृदयम् - सूत्रस्थानम् - १५. शोधनादिगणसङ्ग्रहोध्यायः
अष्टाङ्गसङ्ग्रहः - सूत्रस्थानम् - १६. विविधद्रव्यगणसङ्ग्रहः
श्यामादन्तीद्रवन्तीक्रमुककुटरणाशङ्खिनीचर्मसाह्वा ।
स्वर्णक्षीरी गवाक्षी शिखरि रजनकच्छिन्नरोहाकरञ्जाः|
बस्तान्त्री व्याधिघातो बहलबहुरसस्तीक्ष्णवृक्षात् फलानि
श्यामाद्यो हन्ति गुल्मं विषमरुचिकफौहृद्रुजं मूत्रकृच्छ्रम्||४५||
सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या ( कृत)
श्यामा-मालविका त्रिवृत् मसूरविदलाख्या| दन्ती-मुकूलकश्चित्राख्यः| द्रवन्ती-उन्दुरकर्णिका| क्रमुकः-पट्टिकारोध्रः| कुटरणा-शुक्ला त्रिवृत्| शङ्खिनी-यवतिक्ता| चर्मसाह्वा-सातला, ब्राह्मीत्यन्ये| स्वर्णक्षीरी-कङ्कुष्ठम्| गवाक्षी-गवादनी स्थाणुकर्णीसंज्ञा, इन्द्रवारुणीत्यन्ये| शिखरी-अपामार्गः| रजनकः-कम्पिल्लकः| छिन्नरोहा-अमृतवल्ली| करञ्जः-कैडर्यः| बस्तान्त्री-वृषगन्धा| व्याधिघातः- कृतमालः| बहुलो-बहुफलः| बहुरसः-इक्षुः| तीक्ष्णवृक्षात्-पीलोः फलानि| श्यामादिरेष गुल्मादीन् हन्ति| [अत्र पिप्पल्यादिः प्रसिद्धत्वान्नोक्तः| ] म्रौ भ्रौ याश्च त्रयः स्युः स्वरमुनितुरगैः स्रग्धरास्याद्विरामैः|
आयुर्वेदरसायनम् व्याख्या
श्यामादिगणमाह-श्यामेत्यादि| श्यामा-कृष्णमूला न्निवृत्| द्रवन्ती-चीरितपत्रा दन्तीभेदः| क्रमुकः-पूराः| कुठरणा-अरुणमूला त्रिवृत् | चर्मसाह्वा-सत्पला| शिखरी-अपामार्गः| रजनकः-कम्पिल्लः| छिन्नरोहा-गुडूची| बस्तान्त्री-वृद्धदारुकः| व्याधिधातः-आरग्वधः| बहलः-शिग्रुः| बहुरसः-इक्षुः| तीक्ष्णवृक्षः-पीलुः, तस्य फलानि|
अष्टाङ्गनिघण्टु - २६. श्यामादिगण
श्यामादन्तीद्रवन्तीक्रमुककुटरणाशङ्खिनी चर्मसाह्वा- स्वर्णक्षीरीगवाक्षीशिखरिरजनकच्छिन्नरोहाकरञ्जाः |
बस्तान्त्री व्याधिघातो बहलबहुरसस्तीक्ष्णवृक्षात् फलानि श्यामाद्यो हन्ति गुल्मं विषमरुचिकफौ हृद्रुजं मूत्रकृच्छ्रम् ||१९१||
मसूरविदला श्यामा श्यामादो कालमेषिका | सुषेणिका शशाह्वा च कालिन्दी कालिका स्मृता ||१९२||
चित्रा मुकूलको दन्ती निकुम्भः शम्बरस्तथा | उदुम्बरच्छदा हस्तिदन्ती स्यादुपचित्रका ||१९३||
न्यग्रोधाह्वा सुतत्रेणी द्रवन्त्युन्दुरुकर्णिका | कुम्भस्त्री भट्टिनी सूत्रा श्यामा कुटरणा त्रिवृत् ||१९४||
शङ्खिनी तिक्तला वक्री यवतिक्ता किशोरिका | शङ्खावर्ता शङ्खपुष्पी विशिखा नाहिका स्मृता ||१९५||
सातला सप्तला चर्मेकषाह्वाऽऽवर्तकी स्मृता | अन्येषां तु तथा ब्राह्मी ब्रह्मनामा तु कीर्तिता ||१९६||
स्वर्णक्षीरी हैमवती कङ्कुष्ठस्तीक्ष्णदुग्धिका | इन्द्रवारुणिका चैन्द्री गवाक्षी गजचिर्भिटी ||१९७||
विशाला च विशल्या च सैव प्रोक्ता गवादनी | गिरिकर्ण्यश्वक्षुरकः स्थाणुकर्णी गवादनी ||१९८||
नीलस्पन्दा नीलपुष्पी नीलाख्या गिरिकर्णिका | तिल्वकः शिखरी श्वेतत्वक् तिरीटो बृहच्छदः ||१९९||
कम्पिल्लको रञ्जनको रेचनो रक्तचूर्णकः | बस्तान्त्री वृषगन्धाख्या मेषान्त्री वृषपत्रिका ||२००||
घनभूरिरसस्त्विक्षुः गुडमूलोऽसिपत्रकः | तीक्ष्णवृक्षः शणः पीलुः प्रोक्तोऽन्यः स्थाणुकस्तथा ||२०१||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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