Brief Description
अष्टाङ्गसङ्ग्रहः - सूत्रस्थानम् - १६. विविधद्रव्यगणसङ्ग्रहः
विदारिपञ्चाङ्गुलवृश्चिकालीवृश्चलीवदेवाह्वयशूर्पपर्ण्यः| कण्डूकरी जीवनह्रस्वसंज्ञे द्वे पञ्चके गोपसुता त्रिपादी|
विदार्यादिरयं हृद्यो बृंहणो वातपित्तहा| शोषगुल्माङ्गमर्दोर्ध्वश्वासकासहरो गणः||२||
अष्टाङ्गहृदयम् - सूत्रस्थानम् - १५. शोधनादिगणसङ्ग्रहोध्यायः
विदारिपञ्चाङ्गुलवृश्चिकाली वृश्चीवदेवाह्वयशूर्पपर्ण्यः|
कण्डूकरी जीवनह्रस्वसंज्ञे द्वे पञ्चके गोपसुता त्रिपादी||९||
विदार्यादिरयं हृद्यो ब्रूंहणो वातपित्तहा | शोषगुल्माङ्गमर्दोर्ध्वश्वासकासहरो गणः||१०||
सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या
विदारी-वृष्यकन्दा| पञ्चाङ्गुलः-एरण्डः| वृश्चिकाली-उष्ट्रधूमका मेषश्रृङ्गी वा| वृश्चीवः-क्षुद्रवर्षाभूः| देवाह्वयः-सुरदारु| [देवाद्वयेति पाठे एका सहदेवा द्वितीया विश्वदेवा चेति देवाद्वयम्| ] शूर्पर्ण्यौ-मुद्गपर्णी माषपर्णी च| कण्डूकरी-कपिकच्छूः| जीवनेत्यादि| अभीरुवीराजीवन्तीजीवकर्षभकैः स्मृतम्| जीवनाख्यम् (हृ. सू. अ. ६|१७०) इति जीवनसंज्ञं पञ्चमूलम्| बृहती कण्टकारिका शालिपर्णी पृश्निपर्णी गोक्षुरकमिति ह्रस्वसंज्ञं पञ्चमूलम्| गोपसुता-सारिवा| त्रिपादि-हंसपादी कीटमारिकाख्या| एष विदार्यादिगणो बृंहणो वातपित्तघ्नः शोषादिहरश्च| उपजातिर्वृत्तम्|
आयुर्वेदरसायनम् व्याख्या
अथविदार्यादिप्रभृतयः| तत्र विदार्यादिगणमाह-विदारीति| वृश्चिकाली-वृश्चिकाली-वृश्चिकपत्रा| वृश्चिवः-पुनर्नवा| देवाद्वयं-सहदेवा विश्वदेवा च| शूर्पपर्ण्यौ-मुद्रपर्णी माषपर्णी च| कण्डूकरी-कपिकच्छूः| जीवनं हस्वं च पञ्चमूलं-प्रागुक्तम्| दोपसुता-सारिवा| त्रोपादी-हंसपादी| अयं विदार्यादिगणो हृद्यर्वादिगुणः| शोषो-राजयक्ष्मा| ऊर्ध्वः-उदवर्तः|
अष्टाङ्गनिघण्टु - १. विदार्यादिगण
विदारिपञ्चाङ्गुलवृश्चिकालीवृश्चीवदेवाह्वयशूर्पपर्ण्यः | कण्डूकरो जीवनह्रस्वसञ्ज्ञे द्वे पञ्चके गोपसुता त्रिपादी ||२||
विदार्यादिरयं हृद्यो बृंहणो वातपित्तहा | शोषगुल्माङ्गमर्दोर्ध्वश्वासकासहरो गणः ||३||
विदारी गजवाजीष्टा वृषगन्धेक्षुगन्धिका | शृगालिका पुष्पवल्ली शुक्लकन्दा पलाशिका ||४||
क्षीरेक्षुवल्लीगन्धान्या क्षीरशुक्ला पयस्विनी | वल्लीपलाशिका क्षीरविदारी श्रेष्ठकन्दकः ||५||
पञ्चाङ्गुलो वर्धमानश्चित्रो गन्धर्वहस्तकः | उरुवूकस्तथैरण्ड आमण्डो वातनाशनः ||६||
रक्तैरण्डो द्वितीयस्तु व्याघ्रो व्याघ्रतलोपमः | नक्राहिदंष्ट्रिका कोली वृश्चिकाल्युष्ट्रधूमकः ||७||
कालेयी धूमपत्रोष्ट्रा विशल्या सर्पदंष्ट्रिका | पुनर्नवा वर्षकेतुः वृश्चीवः श्वेतमूलकः ||८||
वर्षाभूः दीर्घपत्रा च विकसस्तु कठिल्लकः | सुनाडिको रक्तपुष्पो विशाखो मण्डलच्छदः ||९||
सहदेवा महागन्धा देवगन्धा बलाह्वया | गाङ्गेरुकी नागबला खरबन्धा निशाह्वया ||१०||
विश्वदेवा झषा काला तथा चाश्वगवेधुका | मुद्गपर्णी सहा सूप्यपर्णी मार्जारगन्धिका ||११||
काकमुद्गा क्षुद्ररसा चास्रपित्तहरा सरा | पिशाची सिंहविन्ना च माषपर्णी महासहा ||१२||
मर्कटी चात्मगुप्ता च कण्डूकृत् कपिकच्छुरा | वृष्यबीजा गलेकण्डूकरी शार्दूलविग्रहा ||१३||
फाणिजिह्वापर्ण्यभीरुः पीवरीन्दीवरी वरी | सूक्ष्मपत्रा द्वीपिशत्रुः शतमूली शतावरी ||१४||
काकोली कबरी वीरा ध्वाङ्क्षोली क्षीरशुक्लिका | जीवन्ती जीवनी जीवा शाकश्रेष्ठा सुमङ्गला ||१५||
पयस्या पयसी पोटगला ज्ञेयार्कपुष्पिका |जीवकः कूर्चनिभस्तु वृषाणी वृषभो वृषः ||१६||
पृश्निपर्णी पृथक्पर्णी धावनी कलशी गुहा | शृगालविन्ना लाङ्गूली स्थिरा क्रोष्टुकपुच्छिका ||१७||
विदारिगन्धांशुमती शालपर्णी स्थिरा ध्रुवा | त्रिपर्ण्यतिगुहा सौम्या महाक्षी तन्विका मता ||१८||
व्याघ्री निदिग्धिका क्षुद्रा द्रावणी कण्टकारिका | सिंहा च क्षुद्रवार्ताकी बृहती बहुपुत्रिका ||१९||
वार्ताकी हिङ्गुली सिंही भाण्टाकी दुष्प्रधर्षिणी | गोकण्टको गोक्षुरकः श्वदंष्ट्रा च त्रिकण्टकः ||२०||
कन्या गोपी कृष्णवल्ली सारिवा फणिजिह्विका | सुगन्धिमूला भद्रा च सुगन्धा गोपवल्ल्यपि ||२१||
हंसपादी रक्तपादी त्रिपादी कीटमारिका | धृतराष्ट्रपदी चैव मृतमन्दातिपर्णिका ||२२||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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