नील शंखपुष्प पञ्चाङ्गम् - 2 / नील अपराजिता पञ्चाङ्गम् - Neela Shankhapushpam Panchangam - 2 / Neela Aparajita Panchangam
Scientific Name: Clitoria ternatea
Hindi Name: नील शंखपुष्पी पंचांग - 2 / नील अपराजिता पंचांग / गिरिकर्णिका की पंचांग - Neela Shankhapushpi Panchang / Neela Aparajita / Girikarnika -
English Name: Butterfly Pea, Winged- leaved Clitoria, Mezereon - Blue variant - Whole plant
Category: Plant Parts
Sub-Category: पञ्चाङ्गम् - Panchangam - Whole plant
Out of Stock
Brief Description
This plant used as Shankhapushpi in south india is cathartic, diuretic, anti tussive and memory enhancer.
कैयदेवनिघण्टु - १. ओषधिवर्ग
विष्णुक्रान्ता
धावली चीली इत्येके |
सफली मूर्दधित्यमि विष्णुक्रान्ताऽपराजिता | सतीनिका नीलपुष्पी दीनिकी क्षुरिका जया ||६८८||
तस्यान्तबीजोऽर्कसुतो विषगन्धो विषोदरः | अशीतकः सूक्ष्मपत्रा सतीनछदिका तथा ||६८९||
शुक्रपुष्पा भूमिलग्ना ह्रस्वा सा शङ्खपुष्पिका | विष्णुक्रान्ता कटुस्तिक्ता बुद्धिमेधास्मृतिप्रदा ||६९०||
कषाया कटुका पाके व्रणकृमिकफापहा | शाकं विषघ्नं गुरु शङ्खपुष्प्या |
दाहं सपित्तं विनिहन्ति वातम् |६९१|
शङ्खपुष्पी
शङ्खपुष्पी क्षीरपुष्पी कम्बुपुष्पी मनोरमा ||१४९३||
शिवाब्राह्मी भूतिलता किरीटी कम्बुमालिका | माङ्गल्यपुष्पी शङ्खाह्वा मेध्या वनविलासिनी ||१४९४||
मङ्गल्यान्या रक्तपुष्पा सुभद्रा सूक्ष्मपत्रिका | सर्पाक्षी त्वपरा विष्णुक्रान्तान्या नीलपुष्पिका ||१४९५||
शङ्खपुष्पी सरा स्वर्या कटुस्तिक्ता रसायनी | अनुष्णा वर्णमेधाग्निबलायुःकान्तिदा हरेत् ||१४९६||
दोषापस्मारलूतास्त्रीकुष्ठभूतविषकृमीन् ||१४९७||
धन्वन्तरिनिघण्टु - ४. करवीरादिवर्ग
अश्वक्षुरा
अश्वक्षुरा श्वेतपुष्पी श्वेता च गिरिकर्णिका | कटभी श्वेतानामा च श्वेतस्यन्दाऽपराजिता ||८४||
नीलपुष्पा महाश्वेता गिरीकर्णी गवादनी | वल्ली चात्युग्रगन्धा च नीलस्पन्दा प्रकीर्तिता ||८५||
गिरिकर्णीद्वयं तिक्तं पित्तोपद्रवनाशनम् | चक्षुष्यं विषदोषघ्नं त्रिदोषशमनं च तत् ||८६||
गिरिकर्णी हिमा तिक्ता पित्तोपद्रवनाशिनी | विषनेत्रविकारांश्च हन्ति कुष्ठरुजापहा ||८७||
निघण्टुशेष - ३. लताकाण्ड
गिरिकर्णी
स्याद् गिरिकर्ण्यामास्फोता विष्णुक्रान्ताऽपराजिता ||३०७||
निघण्टुशेषटीका व्याख्या (श्रीवल्लभगणि कृत)
गिरिः-अश्मेव कर्णोऽस्याः गिरिकर्णी, “पाक-कर्ण-पर्ण-वालान्तात्” [सिद्ध. २.४.५५] इति ङीः, तस्याम्| आ-समन्तात् स्फुटति आस्फोता, पृषोदरादित्वात् तकारः| विष्णुना क्रम्यते विष्णुक्रान्ता| अत एव रक्षाहेतुत्वाद् अपराजिता अप्रतिहता|
एतस्या लोके ‘गिरणई’ इति प्रसिद्धिः||३०७||
कृष्णगिरिकर्णी
.. .. .. कृष्णा त्वव्यक्तगन्धिका ||३०८||
नीलस्यन्दा नीलपुष्पी महाश्वेता गवादनी |३०९|
निघण्टुशेषटीका व्याख्या (श्रीवल्लभगणि कृत)
‘तुः’ पुनरर्थे| कृष्णा गिरिकर्णी, अव्यक्तो गन्धोऽस्याः अव्यक्तगन्धिका||३०८||
नीलः स्यन्दोऽस्याः नीलस्यन्दा| नीलवर्णानि पृष्पाण्यस्याः नीलपुष्पी| महती चासौ श्वेता च महाश्वेता| गावोऽदन्त्यस्यां गवादनी, अनटि “स्वरे वाऽनक्षे” [सिद्ध. १.२.२९] इत्यवादेशः|
एतस्या लोके ‘कालीगिरणई’ इति प्रसिद्धिः| आह च–
अश्वखुरः श्वेतपुष्पी श्वेता च गिरिकर्णिका|
कटभी श्वेतनामा च श्वेतस्यन्दाऽपराजिता||
नीलपुष्पी महाश्वेता गिरिकर्णी गवादनी|
वेशी चात्युग्रगन्धा च नीलस्यन्दा प्रकीर्तिता| [धन्व. वर्ग ४ श्लो. ८४-८५] इति|
एतानि सर्वाणि “स्याद् गिरिकर्ण्यामास्फोता” [श्लो. ३०७] इत्याद्यारभ्य गिरिकर्णीनामानि
भावप्रकाश-पूर्वखण्ड-मिश्रप्रकरण - ४. गुडूच्यादिवर्ग
अपराजिता
आस्फोता गिरिकर्णी स्याद्विष्णुक्रान्ताऽपराजिता | अपराजिते कटू मेध्ये शीते कण्ठ्ये सुदृष्टिदे |
कुष्ठमूत्रत्रिदोषामशोथव्रणविषापहे | कषाये कटुके पाके तिक्ते च स्मृतिबुद्धिदे ||९७||
मदनपालनिघण्टु - १. अभयादिवर्ग
विष्णुक्रान्ता
विष्णुक्रान्ता नीलपुष्पी जया वश्याऽपराजिता | विष्णुक्रान्ता कटुर्मेध्या कृमिव्रणकफाञ्जयेत् ||२७५||
कटभी
श्वेतस्यन्दा श्वेतपुष्पा कटभिर्गिरिकर्णिका | सिताऽपराजिता श्वेता विषघ्नी मे(मो)हनाशिनी ||३०७||
नीलस्यन्दा व्यक्तगन्धा नीलपुष्पा गवादिनी | श्वेतस्यन्दाद्वयं शीतं ग्रहघ्नं दृष्टिकण्ठकृत् |
कुष्ठशूलत्रिदोषामशोफव्रणविषापहम् ||३०८||
मदनपालनिघण्टु - १. अभयादिवर्ग
बलामोटा
बलामोटा जया सूक्ष्मपत्रा ज्ञेयाऽपराजिता | बलामोटा विषश्लेष्मकृच्छ्रनुद्विजयप्रदा ||३१५||
राजनिघण्टु - ३. गुडूच्यादिवर्ग
अश्वक्षुरा
अश्वक्षुराऽद्रिकर्णी च कटभी दधिपुष्पिका | गर्दभी सितपुष्पी च श्वेतस्यन्दाऽपराजिता ||८७||
श्वेता भद्रा सुपुष्पी च विषहन्त्री त्रिरेकधा | नागपर्यायकर्णी स्यादश्वाह्वादिक्षुरी स्मृता ||८८||
गिरिकर्णी हिमा तिक्ता पित्तोपद्रवनाशिनी |चक्षुष्या विषदोषघ्नी त्रिदोषशमनी च सा ||८९||
राजनिघण्टु - ३. गुडूच्यादिवर्ग
शङ्खपुष्पी
शङ्खपुष्पी सुपुष्पी च शङ्खाह्वा कम्बुमालिनी | सितपुष्पी कम्बुपुष्पी मेध्या वनविलासिनी ||१३१||
चिरिण्टी शङ्खकुसुमा भूलग्ना शङ्खमालिनी | इत्येषा शङ्खपुष्पी स्यादुक्ता द्वादशनामभिः ||१३२||
शङ्खपुष्पी हिमा तिक्ता मेधाकृत्स्वरकारिणी | ग्रहभूतादिदोषघ्नी वशीकरणसिद्धिदा ||१३३||
राजनिघण्टु - ४. शताह्वादिवर्ग
शेफालिका
शेफालिका तु सुवहा शुक्लाङ्गी शीतमञ्जरी प्रोक्ता |
अपराजिता च विजया वातारिर्भूतकेशी च ||१५५||
शेफालिः कटुतिक्तोष्णा रूक्षा वातक्षयापहा |
स्यादङ्गसन्धिवातघ्नी गुदवातादिदोषनुत् ||१५६||
राजनिघण्टु - ५. पर्पटादिवर्ग
विष्णुक्रान्ता
विष्णुक्रान्ता हरिक्रान्ता नीलपुष्पाऽपराजिता | नीलक्रान्ता सतीना च विक्रान्ता छर्दिका च सा |
विष्णुक्रान्ता कटुस्तिक्ता कफवातामयापहा ||८९||
शब्दचन्द्रिका - १. वृक्षादिवर्ग
अपराजिता
आस्फोता गिरिकर्णी स्याद् विष्णुक्रान्ताऽपराजिता ||१६८||
अभया वैष्णवी दुर्गा महापुष्पा महेश्वरी |१६९|
सरस्वतीनिघण्टु - ४. लतावर्ग
गिरिकर्णी
आस्फोता गिरिकर्णी च वृषभाक्षी विषापहा ||२०||
नीलपूर्वा श्वेतपूर्वा द्विधास्यादपराजिता |२१|
सोढलनिघण्टु
नामसङ्ग्रह (प्रथम भाग) - ४. करवीरादिवर्ग
अपराजिता
अश्वखुर्यां श्वेतपुष्पी श्वेता च गिरिकर्णिका ||५२४||
कटभी श्वेतनामा च श्वेतस्पन्दाऽपराजिता | विषघ्नी जनिका भण्डा गर्दभी दधिपुष्पिका ||५२५||
गिरिकर्णी
नीलपुष्पा महानीला गिरिकर्णी गवादनी | वल्ली चात्युग्रगन्धा च नीलस्पन्दा गवाक्ष्यपि ||५२६||
Cinnamic acid
Anthocyanin
Triterpene
sitosterols
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | कटु - Katu - Pungent तिक्त - Tikta - Bitter कषाय - Kashaya - Astringent |
|---|---|
| Guna | तीक्ष्णम् - Tikshnam - Drug action which irritates body by its Pungent quality उष्णं गुणम् - Ushna Gunam - Drug action which imparts heat |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Katu |
| Prabhava | विष (Visha) |
| Anupanam | उष्ण जलम् - Ushna Jalam - Hot Water | modal-content
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|