Brief Description
सु.चि.३/५५-६६
अत ऊर्ध्वं प्रवक्ष्यामि तैलं भग्नप्रसाधकम् |
रात्रौ रात्रौ तिलान् कृष्णान् वासयेदस्थिरे जले ||५५||
दिवा दिवा शोषयित्वा गवां क्षीरेण भावयेत् |
तृतीयं सप्तरात्रं तु भावयेन्मधुकाम्बुना ||५६||
ततः क्षीरं पुनः पीतान् सुशुष्कांश्चूर्णयेद्भिषक् |
काकोल्यादिं सयष्ट्याह्वं मञ्जिष्ठां सारिवां तथा ||५७||
कुष्ठं सर्जरसं मांसीं सुरदारु सचन्दनम् |
शतपुष्पां च सञ्चूर्ण्य तिलचूर्णेन योजयेत् ||५८||
पीडनार्थं च कर्तव्यं सर्वगन्धशृतं पयः |
चतुर्गुणेन पयसा तत्तैलं विपचेद्भिषक् ||५९||
एलामंशुमतीं पत्रं जीवकं तगरं तथा |
रोध्रं प्रपौण्डरीकं च तथा कालानुसारि(वा)णम् ||६०||
सैरेयकं क्षीरशुक्लामनन्तां समधूलिकाम् |
पिष्ट्वा शृङ्गाटकं चैव पूर्वोक्तान्यौषधानि च ||६१||
एभिस्तद्विपचेत्तैलं शास्त्रविन्मृदुनाऽग्निना |
एतत्तैलं सदा पथ्यं भग्नानां सर्वकर्मसु ||६२||
आक्षेपके पक्षघाते तालुशोषे तथाऽर्दिते |
मन्यास्तम्भे शिरोरोगे कर्णशूले हनुग्रहे ||६३||
बाधिर्ये तिमिरे चैव ये च स्त्रीषु क्षयं गताः |
पथ्यं पाने तथाऽभ्यङ्गे नस्ये बस्तिषु भोजने [१] ||६४||
ग्रीवास्कन्धोरसां वृद्धिरमुनैवोपजायते |
मुखं च पद्मप्रतिमं ससुगन्धिसमीरणम् ||६५||
गन्धतैलमिदं नाम्ना सर्ववातविकारनुत् |
राजार्हमेतत् कर्तव्यं राज्ञामेव विचक्षणैः ||६६||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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