Brief Description
शा.म.७/८८-९४
त्रिफलाष्टपला कार्या भल्लातं च चतुष्पलम् ॥बाकूची पञ्चपलिका विडङ्गानां चतुष्पलम् ॥
हतलोहं त्रिवृच्चैव गुग्गुलुश्च शिलाजतु । एकैकं पलमात्रं स्यात् पलार्धं पौष्करं भवेत् ॥
चित्रकस्य पलार्धं स्यात् द्विशाणं मरिचं भवेत् ।नागरं पिप्पली मुस्ता त्वगेला पत्रकुङ्कुमम् ॥
शाणोन्मितं स्यादेकैकं चूर्णयेत् सर्वमेकतः ।ततस्तत् प्रक्षिपेत् चूर्णं पक्वखण्डे च तत्समे ॥
मोदकान् पलिकान् कृत्वा प्रयुञ्जीत यथोचितान् ।हन्युः सर्वाणि कुष्ठानि त्रिदोषप्रभवामयान् ॥
भगन्धरप्लीहगुल्मान् जिह्वातालुगलामयान् । शिरोक्षीभ्रूगतान् रोगान् हन्यात् पृष्ठगतान्यपि ॥
प्राग्भोजनस्य देयं स्यादधकायस्थिते गदे । भेषजं भक्तमध्ये च रोगे जठर संस्थिते ॥
भोजनस्योपरिग्राह्यं ऊर्ध्वजत्रुगदेषु च ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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