Brief Description
भै.र.५४/२१७-२२२
अमृतायाः पलशतं दशमूल्यास्तथा शतम् । पाठामूर्वाबलातिक्ता दार्वीगन्धर्वहस्तकाः ॥ १०॥
एषां दशपलान् भागान् विभीतक्याः शतं हरेत् । द्वे शते च हरीतक्या आमलक्यास्तथा शतम् ।।६१||
जलद्रोणद्वये पक्त्वा अष्टभागावशेषितम् । प्रस्थं गुग्गुलुमाहृत्य प्रस्थाद्धं च घृतं पचेत् ॥ १२ ॥
पाकसिद्धौ प्रदातव्यं गुडच्याः सत्वमेव च । पलद्वयं तथा शुण्ठ्याः पिप्पल्याश्च पलद्वयम् ॥ ६॥
ततो मात्रां प्रयुञ्जीत ज्ञात्वा दोषबलाबलम् । अष्टादशसु कुष्ठेषु वातरक्तगदेषु च ॥ १४ ॥
कामलामामवातं च अग्निमान्द्य भगन्दरम् । पीनसं च प्रतिश्यायं प्लीहानमुदरं तथा ।
एतान् रोगान् निइन्त्याशु भास्करस्तिमिरं यथा ।। ६५ ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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