Brief Description
भा.प्र.म.२९/२३७-२४६
पिण्डितां गुग्गुलोर्मानीं कटुतैले पलाष्टके । प्रत्येकं त्रिफलाप्रस्थं सार्द्धद्रोणे जले पचेत् ॥
पादशेषं सुपूतञ्च पुनरग्नावधिश्रयेत् । त्रिकटुत्रिफलामुस्तविडङ्गामलकानि च ॥
गुडूच्यग्नित्रिवृद्दन्ती वचासूरणमानकम् । कस्तूरीरससूतांशं प्रत्येकं शुक्तिसम्मितम् ॥
सहस्रं कानकफलं सिद्धे सञ्चूर्ण्य निक्षिपेत् । ततो माषद्वयं जग्ध्वा पिबेत्तप्तजलादिकम् ॥
अग्निञ्च कुरुते शीघ्रं वडवाऽनलसन्निभम् । मेधावृद्धिं वयोवृद्धिं बलं सुविपुलं तथा ॥
आमवातं शिरोवातं ग्रन्थिवातं भगन्दरम् । जानुजङ्घाश्रितं वातं सकटीग्रहवेदनम् ॥
अश्मरीमूत्रकृच्छ्रे च भग्ने च तिमिरोदरे । अम्लपित्तं तथा कुष्ठं प्रमेहं गुदनिर्गमम् ॥
कासं पञ्चविधं श्वासं क्षयञ्च विषमज्वरम् । प्लीहानं श्लीपदं गुल्मान्पाण्डुरोगं सकामलम् ॥
शोथान्त्रवृद्धिशूलानि गुदजानि विनाशयेत् । मेदः कफामसञ्जातरोगवारणदर्पहा ॥
सिंहनाद इति ख्यातो योगोऽयममृतोपमः । भिषग्भिर्वर्जिते रोगे भाषितो दण्डपाणिना ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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