Brief Description
भा.प्र.म.२९/२२२-२२८
पलत्रयं कषायस्य त्रिफलायाः सुचूर्णितम् । सौगन्धिकं पलञ्चैकं कौशिकस्य पलत्रयम् ॥
कुडवं चित्रतैलस्य सर्वमादाय यत्नतः । पाचयेत्पाकविद्वैद्यः पात्रे लोहमये दृढे ॥
हन्ति वातं तथा पित्तं श्लेष्माणं खञ्जपङ्गुताम् ।श्वासं सुदुर्जयं हन्ति कासं पञ्चविधं तथा ॥
कुष्ठानिवातरक्तञ्च गुल्मशूलोदराणि च ।आमवातं जयत्येतदपि वैद्यविवर्जितम् ॥
सर्वदाऽस्योपयोगेन जरापलितनाशनम् । सर्पिस्तैलरसोपेतमश्नीयाच्छालिषष्टिकम् २॥
सिंहनादइति ख्यातो रोगवारणदर्पहा । वह्नेर्दीप्तिकरं पुसां भाषितो दण्डपाणिना ॥
अत्राहुस्त्रिफलाक्वाथं पृथक् त्रिपलसम्मितम् किञ्चिन्निर्याति चैरण्डस्नेहे पाकोऽधिके खरः ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|