Brief Description
भा.प्र.म.२९/१७०-१७५
यावशूकसुरदारु सैन्धवं मुस्तकत्रुटिवचायवानिकाः ॥ व्योषदीप्यकनिशाफलत्रिकम् जीरकद्वयविडङ्गचित्रकम् ॥
कार्षिकं सुमसृणं सुयोजितं संयुतं पुरपलैश्च पञ्चभिः । शर्करां सुपेशयेत् तत् सर्पिषि विनिक्षिपेत् ततः ॥
वातरक्तमुदरं भगन्धरं प्लीहयक्ष्मविषमज्वरं गरम् । श्वित्रकुष्ठमखिलवृणानयं चित्तविभ्रम गदांश्च दारुणान् ॥
गृधृसीं च गुदजाग्निमन्दतां हन्ति कोष्ठजनितं महागदम् । वज्रमिन्द्रसुकरादिव च्युतं गुप्तशैलकुलमुत्तमं द्रुतम् ॥
अन्नपान परिहारवर्जितं सर्वकालसुखदं निरत्ययम् ।सेव्यमानमिदमश्विनिर्मितं गुग्गुलोर्हि वटिका रसायनम् ।
चत्वारो माषकाः हीने मध्यमेष्टौ च माषकाः । श्रेष्ठाः द्वादशकाः प्रोक्ताः कोष्ठं विज्ञाय पाययेत् ॥
स्रंसनत्वाद् गुरुत्वाद्वा गुग्गुलॊः करणक्रमः ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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