Brief Description
च.चि.२९/८८-९५,अ.स.चि २४ /१५
निर्हरेद्वा मलं तस्य सघृतैः क्षीरबस्तिभिः| न हि बस्तिसमं किञ्चिद्वातरक्तचिकित्सितम्||८८||
बस्तिवङ्क्षणपार्श्वोरुपर्वास्थिजठरार्तिषु| उदावर्ते च शस्यन्ते निरूहाः सानुवासनाः||८९||
दद्यात्तैलानि चेमानि बस्तिकर्मणि बुद्धिमान्| ।नस्याभ्यञ्जनसेकेषु दाहशूलोपशान्तये||९०||
मधुयष्ट्यास्तुलायास्तु [१] कषाये पादशेषिते| तैलाढकं समक्षीरं पचेत् कल्कैः पलोन्मितैः||९१||
शतपुष्पावरीमूर्वापयस्यागुरुचन्दनैः| स्थिराहंसपदीमांसीद्विमेदामधुपर्णिभिः||९२||
काकोलीक्षीरकाकोलीतामलक्यृद्धिपद्मकैः| जीवकर्षभजीवन्तीत्वक्पत्रनखवालकैः||९३||
प्रपौण्डरीकमञ्जिष्ठासारिवैन्द्रीवितुन्नकैः| चतुष्प्रयोगात्तद्धन्ति तैलं मारुतशोणितम्||९४||
सोपद्रवं साङ्गशूलं सर्वगात्रानुगं तथा| वातासृक्पित्तदाहार्तिज्वरघ्नं बलवर्णकृत्||९५||
इति मधुपर्ण्यादितैलम्|
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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