Brief Description
अ.हृ.चि.२२/४४
मधुयष्ट्याः पलशतं कषाये पादशेषिते|
तैलाढकं समक्षीरं पचेत्कल्कैः पलोन्मितैः||४१||
स्थिरातामलकीदूर्वापयस्याभीरुचन्दनैः|
लोहहंसपदीमांसीद्विमेदामधुपर्णिभिः||४२||
काकोलीक्षीरकाकोलीशतपुष्पर्द्धिपद्मकैः|
जीवकर्षभजीवन्तीत्वक्ऽऽपत्रनख़वालकैः||४३||
प्रपौण्डरीकमञ्जिष्ठासारिवैन्द्रीवितुन्नकैः|
चतुष्प्रयोगं वातसृक्ऽऽपित्तदाहज्वरार्तिनुत्||४४||
मधुयष्ट्याः पलशतं क्वाथकल्पनया क्वथितं तस्मिन्कषाये पादशेषिते चतुर्भागावशिष्टे तैलस्याढकं समक्षीरमाढकप्रमाणेन क्षीरेण तुल्यं स्थिरादिभिः पलोन्मितैः कल्कीकृतैर्युक्तं पचेत्| तत्तैलं चतुष्प्रयोगं-पाने नस्येऽनुवासने बस्तौ च योजितं, वातासृगादीनामर्तिनुद्भवेत्| स्थिरा-शालिपर्णी| तामलकी-भूधात्री| पयस्या-अर्कपुष्पी| अभीरुः-शतावरी| लोहं-अगरु| हंसपदी-कीटमारी| मधुपर्णी-गुडूची| ऐन्द्री-विशाला| वितुन्नकं-परिपेलवम्|
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|