Brief Description
अ.सं.उ.४७/१८
कृशस्यातिस्रुते रक्ते रूक्षैरत्यर्थसेवितैः| विषस्य च स्वभावेन मातरिश्वा प्रकुप्यति|
उन्मादाक्षेपकमनोभ्रंशापस्मृतयस्ततः|तत्रेष्टं स्नेहनं बस्तिनस्यप्रधमनाञ्जनम्|
नागदन्त्यभयाकुष्ठपिप्पलीवृषकट्फलम्| भल्लातकास्थित्रिकटुकाबिल्वप्रतिविषाग्निकाः|
सक्षीरं तैर्घृतं सिद्धं विषवातविकारजित्| पिबेदेरण्डतैलं वा छागमांसरसान्वितम्|
ऐकध्यं घृततैलं वा मेध्यमासरसाशनणः|
कार्पासमूलं मरिचं हरिद्रे नलदं नलम्| पिप्पलीं स्वर्जिकां कुष्ठं जलेनालोड्य पाययेत्|
उन्मत्तं विषवातेन तथाऽपस्मारिणं नरम्|
वचाहंसपदीव्योषदधित्थं हस्तिपिप्पलीम् | देवदारुबलाबिल्वकृमिजित्कुष्ठटुण्टुकम्|
लोध्राखुकर्ण्यतिविषाः क्षीरं सर्पिश्च पाययेत् | निहन्ति पानाभ्यङ्गाभ्यां घृतं सर्वविषाणि तत्||१८||
कृशस्य रक्तेऽतिस्रुते रूक्षसेवनाद्विषस्वभावाच्च वायुः प्रकुप्यति| ततो हेतोरुन्मादादयो भवन्ति| तत्र स्नेहनं बस्त्यादिकमिष्टम्|
नागदन्त्यादिभिः सक्षीरं सिद्धं घृतं विषहेतून् वातविकारानुन्मादादीन् जयति|
छागमांसरसेनान्वितमेरण्डतैलं वा अथवा मेध्यमांसरसाशनः सन्नैकध्यं घृततैलं वा पिबेत्|
कार्पासमूलादिकं सुबोधम्| विषवातेनेति विषहेतुना वातेन उन्मत्तमुन्मादयुक्तम्|
वचादिभिः सर्पिर्विपाचयेत्| तत्पानेनाभ्यङ्गेन च सर्वविषाणि निहन्ति| हंसपदी मधुस्रवा| दधित्थं कपित्थम्| टुण्टुकः स्योनाकः| आखुकर्णी द्रवन्ती| इति विषानिले|| १८||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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