Brief Description
आकल्लगोक्षुरजटातुलसीशिलाभिरेरंडमूलमगधामधुकैः प्रयुक्तः ।
तक्राहमूलसुरसासुरपुष्पशुंठी क्वाथो निहति बहुलाप्रतिवापतोयम् ।।
सप्ताहमेव पिबतां नियमेन पुंसां घोराश्मरीमतिरुजं सहशर्करां च ।
आवीपयो मधुविमिश्रितमाशु तद्वत् । चूर्ण त्रिवृत्कुटजवीजभवं वदन्ति ।
अकरकरा, गोखरू, जटामांसी, तुलसी, शिलाजित, अरण्डमूल, पीपल, मुलैठी, तक्रा (एक प्रकार का पौदा) की जड़, निर्गुण्डी (संभालु) लौंग और सोंठ। इनके क्वाथ में इलायची के चूर्णका प्रक्षेप डालकर नियमपूर्वक सात दिन तक पीनेसे अत्यन्त पीड़ा युक्त अश्मरी और शर्करा (पथरी और रेग) का नाश होता है । भेड़के दूध में मिलाकर पीने या निसोत और इन्द्रयव का चूर्ण सेवन करने से भी पथरी और रेग का नाश होता है ।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| 1 | अश्मरि - Ashmari - Diseases with Nephrolithiasis / Renal Calculi | आकल्लकादि कषायम् (Akallakadi Kashayam) | पृ. नि. र. अश्मरी | |||
| 2 | शर्कर (Ashmari) | आकल्लकादि कषायम् (Akallakadi Kashayam) | पृ. नि. र. अश्मरी | |||
| 3 | Acute Renal colic Pain | आकल्लकादि कषायम् (Akallakadi Kashayam) | पृ. नि. र. अश्मरी |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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